भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया और हल्का पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक देने वाला है। इसके प्रभाव से आने वाले दिनों में हिमालयी क्षेत्रों और आसपास के मैदानी इलाकों के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
ताजा मौसम अपडेट (16 अप्रैल 2026)
- नया विक्षोभ: 16 अप्रैल की रात से एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करना शुरू करेगा।
- तापमान में वृद्धि: हालाँकि विक्षोभ सक्रिय है, लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों (दिल्ली, पंजाब, हरियाणा) में अधिकतम तापमान में 3-4°C की वृद्धि होने की संभावना है। दिल्ली में पारा 40°C से 42°C तक पहुँच सकता है।
- पहाड़ों पर असर: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश, बिजली कड़कने और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
क्या होता है पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)?
पश्चिमी विक्षोभ एक गैर-मानसूनी वर्षा प्रणाली है। यह भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) में उत्पन्न होने वाला एक निम्न दाब का क्षेत्र है। यहाँ से उठने वाली नमी से भरी हवाएं ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में प्रवेश करती हैं।
मुख्य तथ्य: इसे ‘पश्चिमी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पश्चिम दिशा से आता है, और ‘विक्षोभ’ इसलिए क्योंकि यह वायुमंडल के सामान्य दबाव को बाधित (Disturb) कर मौसम में बदलाव लाता है।
भारत के मौसम पर इसका प्रभाव
| क्षेत्र | प्रभाव |
| हिमालयी क्षेत्र | भारी बर्फबारी और बारिश (सर्दियों में) और गरज के साथ बौछारें (गर्मियों में)। |
| मैदानी इलाके | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में ओलावृष्टि, बारिश और धूल भरी आंधी। |
| तापमान | इसके आने से पहले तापमान बढ़ता है, लेकिन बारिश के बाद पारा गिर जाता है, जिससे गर्मी से राहत मिलती है। |
| कृषि | यह रबी की फसलों (जैसे गेहूं) के लिए सर्दियों में अमृत समान होता है, लेकिन अप्रैल में ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुँचा सकती है। |
अगले 48 घंटों के लिए IMD की चेतावनी
- गर्मी की लहर (Heat Wave): मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में लू चलने की संभावना है।
- पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।
- तेज हवाएं: पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में ‘थंडरस्क्वाल’ (50-60 किमी/घंटा की हवाएं) चलने की संभावना है।
