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केदारनाथ में बर्फबारी और बदरी-यमुनोत्री में बारिश, फिर भी उमड़ रहा श्रद्धालुओं का सैलाब

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का कड़ा इम्तिहान जारी है। मई का महीना होने के बावजूद पहाड़ों पर कड़ाके की ठंड और बर्फबारी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा अपडेट्स के मुताबिक, केदारनाथ धाम में आज सुबह से ही रुक-रुक कर बर्फबारी और बारिश हो रही है, जबकि बदरीनाथ और यमुनोत्री धाम में बारिश ने ठंड को कई गुना बढ़ा दिया है।


प्रमुख अपडेट्स: धामों का ताजा हाल

  • केदारनाथ धाम: बाबा केदार की घाटी पूरी तरह कोहरे की चादर में लिपटी हुई है। सुबह से ही भोर की शुरुआत बारिश और बर्फ की फुहारों के साथ हुई। यहाँ तापमान -6 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे लुढ़क गया है। खराब दृश्यता के कारण केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं अस्थाई रूप से रोकनी पड़ी हैं
  • बदरीनाथ धाम: भगवान बदरी विशाल के दरबार में तापमान -3 डिग्री तक पहुंच गया है। यहाँ हल्की बारिश के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है।
  • यमुनोत्री और गंगोत्री: इन दोनों धामों में भी बारिश के कारण कड़ाके की ठंड पड़ रही है। फिसलन बढ़ने के कारण प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

आस्था की जीत: टूट रहे हैं रिकॉर्ड

मौसम की इस “मार” के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था डगमगा नहीं रही है।

  • अब तक लगभग 6.60 लाख से ज्यादा लोग चारधाम दर्शन कर चुके हैं।
  • सिर्फ केदारनाथ में ही 3.10 लाख से अधिक श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं।
  • बदरीनाथ में आज भी करीब 17,000 लोगों के पहुंचने का अनुमान है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रशासन ने बिगड़ते मौसम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।

  1. जवानों की तैनाती: सोनप्रयाग से केदारनाथ के पैदल मार्ग पर SDRF, NDRF, और ITBP के जवान तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
  2. बुजुर्गों की मदद: बदरीनाथ में सुरक्षाकर्मी बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।
  3. स्वास्थ्य एडवाइजरी: यात्रियों को गर्म कपड़े, रेनकोट और जरूरी दवाइयां साथ रखने के निर्देश दिए गए हैं।

यात्रियों के लिए सलाह: यदि आप भी अगले कुछ दिनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम विभाग के अपडेट्स जरूर देखें और भारी ऊनी कपड़ों के बिना यात्रा न करें। पहाड़ी रास्तों पर बारिश के कारण फिसलन अधिक है, इसलिए पैदल चलते समय सावधानी बरतें।

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