कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया है जिसने राज्य की चार दशक पुरानी राजनीतिक परंपरा को जड़ से हिला दिया है। 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने इस बार परिवर्तन की नई इबारत लिखने का मन बना लिया था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में न केवल बहुमत हासिल किया है, बल्कि 200 से ज्यादा सीटें जीतकर ममता बनर्जी के 15 साल पुराने ‘अजेय’ किले को ध्वस्त कर दिया है।
सत्ता परिवर्तन की सुनामी
सोमवार को आए चुनाव नतीजों में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) महज 81 सीटों पर सिमट कर रह गई है। यह 2021 के नतीजों (जहाँ TMC ने 215 सीटें जीती थीं) के ठीक उलट है।
इस जीत के साथ ही बीजेपी बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाने जा रही है, जो पार्टी के लिए एक वैचारिक और राजनीतिक रूप से सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
भवानीपुर में सबसे बड़ा उलटफेर: सुवेंदु बने ‘जायंट किलर’
इस चुनाव का सबसे रोमांचक और चौंकाने वाला मुकाबला कोलकाता की हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके ही पुराने सिपहसालार और अब बीजेपी के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी ने 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया।
अपनी जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी ने इसे “सनातन की जीत” बताते हुए कहा, “यह बंगाल को अराजकता से मुक्ति दिलाने का जनादेश है।” दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतगणना केंद्रों पर धांधली के आरोप लगाए हैं।
हार और जीत के 3 मुख्य कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल में तीन बड़े कारणों ने खेल पलट दिया:
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद स्थानीय स्तर पर टीएमसी नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और जबरन वसूली (Tolabaazi) के आरोपों ने आम जनता में भारी नाराजगी पैदा की थी।
- वोटों का ध्रुवीकरण: इस बार हिंदू वोटों का एकतरफा झुकाव बीजेपी की तरफ रहा, वहीं मुस्लिम वोटों में बिखराव ने टीएमसी के पारंपरिक आधार को कमजोर कर दिया।
- विकास की आकांक्षा: युवाओं और शहरी मतदाताओं ने “सोनार बांग्ला” के नारे और आर्थिक विकास के वादे पर भरोसा जताया।
आगे क्या?
बीजेपी की इस प्रचंड जीत के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? रेस में सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन पार्टी आलाकमान की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
