भारत सरकार ने 26 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में भारी कटौती करने का बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं।
आसान शब्दों में क्या बदला?
सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर लगने वाले टैक्स में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। इसे आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
| ईंधन (Fuel) | पहले का टैक्स | अब का टैक्स | कितनी कमी हुई? |
| पेट्रोल | ₹13 | ₹3 | ₹10 कम |
| डीजल | ₹10 | ₹0 | ₹10 कम |
क्या आज से पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा?
यहाँ एक पेंच है। टैक्स कम होने के बावजूद, पेट्रोल पंप पर रेट कम नहीं हुए हैं।
ऐसा क्यों? इसका कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बहुत महंगा हो गया है। तेल कंपनियाँ (जैसे Indian Oil, BPCL) पहले ही बहुत घाटे में चल रही थीं। अगर सरकार यह टैक्स कम नहीं करती, तो पेट्रोल-डीजल के दाम 20 से 30 रुपये बढ़ सकते थे।
सीधी बात: सरकार ने टैक्स इसलिए घटाया ताकि बढ़ती कीमतों का बोझ जनता पर न पड़े। दाम भले ही कम नहीं हुए, लेकिन इस कटौती की वजह से दाम बढ़े भी नहीं हैं।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
- महंगाई रोकने के लिए: अगर डीजल महंगा होता, तो ट्रक का किराया बढ़ता और फल-सब्जियों जैसी हर चीज़ महंगी हो जाती।
- सप्लाई बनाए रखने के लिए: सरकार ने विदेश में तेल बेचने पर रोक लगाई है ताकि भारत के पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी न हो।
- आम आदमी की सुरक्षा: खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध (जैसे इजराइल-ईरान तनाव) की वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं। सरकार ने टैक्स का घाटा खुद सहकर जनता को इस झटके से बचाया है।
निष्कर्ष
फिलहाल आपकी जेब से पेट्रोल-डीजल के लिए उतने ही पैसे खर्च होंगे जितने कल हो रहे थे। लेकिन अगर सरकार यह ₹10 का टैक्स कम नहीं करती, तो आज आपको हर लीटर पर ₹10 से ज्यादा एक्स्ट्रा देने पड़ते।
